Home त्यौंहार दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजार : समृद्धि और सुख-शांति का त्योहार……….

दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजार : समृद्धि और सुख-शांति का त्योहार……….

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दीवाली एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो भगवान राम के अयोध्या वापसी के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस त्योहार का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है और यह विभिन्न कारणों से मनाया जाता है-

दीवाली मनाने के कारण

1. भगवान राम की वापसी – दीवाली का त्योहार भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या वापसी की याद में मनाया जाता है। भगवान राम के अयोध्या आगमन पर लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।
2. अंधकार पर प्रकाश की जीत – दीवाली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। यह हमें जीवन में सकारात्मकता और प्रकाश की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
3. मां लक्ष्मी की पूजा : दीवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करके दीप जलाते हैं और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।
4. पापों का नाश – दीवाली के दिन लोग अपने पापों का नाश करने के लिए गंगा स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं।

दीवाली का महत्व

. दीवाली का त्योहार हमें जीवन में सकारात्मकता और प्रकाश की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
. यह त्योहार हमें अपने परिवार और मित्रों के साथ समय बिताने का अवसर प्रदान करता है।
. दीवाली के दिन दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

दीवाली 2025 में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए एक विशेष दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और धन लाभ की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि दीवाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को सुबह 03 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और 21 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए, इस बार दीवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक
प्रदोष काल
शाम 05 बजकर 46 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक
वृषभ काल
रात 07 बजकर 08 मिनट से रात 09 बजकर 03 मिनट तक

दीवाली पूजा के नियम

1. काले रंग के कपड़े न पहनें।
2. वाद-विवाद से बचें।
3. किसी के बारे में गलत न सोचें।
4. घर और मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
5. पूजा में टूटे हुए बर्तन न प्रयोग करें।
6. मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की खंडित मूर्ति की पूजा न करें।

दीवाली पर दान का महत्व

दीवाली के दिन पूजा करने के बाद दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन अन्न, धन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से व्यक्ति को जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। साथ ही, मां लक्ष्मी की कृपा से बिगड़े काम भी पूरे होते हैं।

मां लक्ष्मी के मंत्र
1. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
3. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

अस्वीकरण : इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। दैनिक जागरण और जागरण न्यू मीडिया इस लेख में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करते हैं।

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