सोनहत के शासकीय प्राथमिक शाला धुमदंडाड की बदहाल तस्वीर सामने आई — बारिश में बढ़ जाता है खतरा, जिम्मेदार विभाग से तत्काल मरम्मत की मांग
Report \Nilesh Soni
सोनहत। विकासखंड सोनहत के शासकीय प्राथमिक शाला धुमदंडाड में अध्ययनरत कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विद्यालय भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं। बारिश के दिनों में भवन की स्थिति और चिंताजनक हो जाती है तथा दीवारों में सीलन आने से छोटे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को ऐसे भवन में अध्ययन करना पड़ रहा है, जहां भवन की जर्जर स्थिति भविष्य में किसी अप्रिय घटना की आशंका को जन्म दे सकती है।
विशेषकर लगातार बारिश के दौरान कमजोर और दरारयुक्त दीवारों के आसपास विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि प्राथमिक स्तर पर पढ़ने वाले बच्चे बेहद कम उम्र के होते हैं। ऐसे में विद्यालय भवन की स्थिति का समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराया जाना जरूरी है।
यदि भवन वास्तव में उपयोग के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है।
शिक्षा विभाग से तत्काल निरीक्षण की मांग

जर्जर भवन की स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मांग है कि विद्यालय भवन का तकनीकी एवं भौतिक निरीक्षण कराया जाए।
दीवारों में आई दरारों, सीलन तथा भवन की मजबूती की जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत अथवा नए भवन के निर्माण की कार्रवाई की जाए।
विधायक और जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप की अपेक्षा
स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय विधायक, जिला प्रशासन तथा स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय का निरीक्षण कराने और आवश्यक बजट उपलब्ध कराकर भवन की मरम्मत कराने की मांग की है।
साथ ही शिक्षा मंत्री से भी ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे विद्यालय भवनों की स्थिति की समीक्षा कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके।
विद्यालय भवन की समस्या को केवल मरम्मत का विषय न मानकर विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा मामला मानते हुए तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना संबंधित विभाग विद्यालय भवन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक कदम उठाएगा?



