उत्तरी नेपाल की भोटे कोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद कई इलाकों में हाहाकार मच गया। बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही दी।
अचानक आई बाढ़ ने घरों, गाड़ियों, पुलों और कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। तिब्बत सीमा से लगे सिंधुपालचोक और रसुवा जिलों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर, बाढ़ की शुरुआत स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से हुई।

तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। यहां कई वाहन, व्यावसायिक सामान और दूसरी संपत्तियां पानी में बह गईं। रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के परिसर में खड़े कई वाहन भी बाढ़ की चपेट में आ गए। उत्तरी रसुवा की एक सीमा चौकी पर तैनात नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल यानी एपीएफ के चार जवान बाढ़ के बाद लापता हैं। इसके अलावा नेपाल पुलिस के 32 जवान और रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं।
नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, बाढ़ से 15 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 10 चालू परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं। हालात को देखते हुए नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने निचले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने और विस्थापित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की संयुक्त टीमें जुटी हुई हैं। तलाशी और बचाव अभियान के लिए 14 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं।
बुधवार को 25 लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी सामने आई थी। अब तक चार शव नुवाकोट और तीन शव धाडिंग जिले में बरामद किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने करीब एक हजार लोगों के लिए जरूरी दवाएं और स्वास्थ्य उपकरण उपलब्ध कराने की घोषणा की है। बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 इमरजेंसी बेड आरक्षित किए गए हैं। तीन गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट कर काठमांडू लाया जा चुका है।

