मध्यप्रदेश
विशेष समाचार वशिष्ठ टाइम्स
सीधी। ग्राम पंचायत सीधी में पंचायत सचिव की लंबे समय से चली आ रही पदस्थापना अब ग्रामीणों के बीच चर्चा और सवालों का विषय बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव पिछले कई वर्षों से इसी पंचायत में पदस्थ हैं और उनके पास अतिरिक्त पंचायत का प्रभार भी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक ही कर्मचारी पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां होने से ग्राम पंचायत सीधी के नियमित प्रशासनिक एवं विकास कार्यों पर कितना प्रभाव पड़ रहा है?

ग्रामीण सूत्रों के अनुसार पंचायत कार्यालय से जुड़े कार्यों, योजनाओं की जानकारी तथा आम ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई देती।
विशेष रूप से गरीब, पिछड़े और जरूरतमंद वर्ग के लोगों ने पंचायत स्तर पर व्यवहार एवं योजनाओं के लाभ को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं दस्तावेजी पुष्टि होना अभी बाकी है।
वर्षों से एक ही जगह पदस्थापना पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत सचिव आखिर कितने वर्षों से ग्राम पंचायत सीधी में पदस्थ हैं? उनकी पहली पदस्थापना कब हुई? इस दौरान कितनी बार स्थानांतरण या पदस्थापना के आदेश जारी हुए? यदि वर्षों से उनका स्थानांतरण नहीं हुआ तो उसके पीछे क्या प्रशासनिक आदेश, अनुमति अथवा विशेष परिस्थिति रही?
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव की लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
अतिरिक्त प्रभार से व्यवस्था पर असर?
ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत सचिव के पास अतिरिक्त पंचायत का प्रभार भी है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि एक साथ दो पंचायतों की जिम्मेदारी संभालने के कारण ग्राम पंचायत सीधी में समय पर कार्यालयीन कार्य, हितग्राहियों की समस्याओं का समाधान, योजनाओं की मॉनिटरिंग और विकास कार्यों की निगरानी किस स्तर तक हो पा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी उठ रहे सवाल
ग्राम पंचायत सीधी में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन को लेकर भी ग्रामीणों के बीच सवाल उठ रहे हैं। पात्र हितग्राहियों को लाभ मिलने, निर्माण की स्थिति, भुगतान, अपूर्ण आवास और हितग्राही चयन जैसे मामलों की दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग उठ रही है।
यदि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो पंचायत प्रशासन को अभिलेख सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
“कुर्सी नहीं, जवाबदेही चाहिए”
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव का पद जनता की सेवा और सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए है। वर्षों तक एक ही पंचायत में पदस्थ रहने के बावजूद यदि ग्रामीणों को अपनी मूलभूत समस्याओं के लिए भटकना पड़े तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जनपद पंचायत जयसिंहनगर एवं जिला पंचायत शहडोल पंचायत सचिव की पदस्थापना अवधि, अतिरिक्त प्रभार, स्थानांतरण रिकॉर्ड तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराएं।
अब रिकॉर्ड बताएगा सच्चाई
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल आरोपों का नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड का है। पंचायत सचिव की नियुक्ति, सीधी में पदस्थापना की तारीख, पिछले वर्षों के स्थानांतरण आदेश, अतिरिक्त प्रभार का आदेश तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े अभिलेख यदि सार्वजनिक जांच के दायरे में आते हैं, तो स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें किसी अधिकारी से विशेष कृपा नहीं चाहिए—उन्हें पारदर्शी व्यवस्था, सम्मानजनक व्यवहार और सरकारी योजनाओं का पात्रता के आधार पर लाभ चाहिए।
ग्राम पंचायत सीधी में पंचायत सचिव की लंबे समय से पदस्थापना और अतिरिक्त प्रभार की प्रशासनिक समीक्षा के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना सहित पंचायत की प्रमुख योजनाओं के अभिलेखों की जांच कराई जाए। जांच के बाद यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो प्रशासन तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करे।

