प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व प्रकरण क्रमांक 202605011200003/अ-5/2025-26 में आवेदक उमेश ठाकुर, पिता जगदीश ठाकुर, निवासी ग्राम सोनहत, जिला कोरिया द्वारा न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सुनवाई की मांग की गई थी। आवेदक का दावा है कि संबंधित भूमि पर निर्मित दुकानों का स्वामित्व एवं राजस्व अभिलेखों में दर्ज विवरण विवादित है।
मामले की जांच के दौरान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हल्का पटवारी के प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम सोनहत स्थित खसरा नंबर 410 और पुराने खसरा नंबर 72 के रिकॉर्ड में भिन्नता पाई गई है। प्रतिवेदन के अनुसार पुराने नक्शे के आधार पर वर्तमान में निर्मित 7 दुकानें आवेदक के खाते की भूमि पर आती हैं।
वहीं शौचालय और सामुदायिक भवन भी पुराने खसरा नंबर 72 की सीमा से बाहर निर्मित पाए गए हैं।
पटवारी प्रतिवेदन और पंचनामा के अवलोकन के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को बंदोबस्त संबंधी त्रुटि से जुड़ा माना है। इसके चलते न्यायालय ने अंतिम निर्णय होने तक विवादित संपत्ति की यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया है।

तहसील न्यायालय सोनहत द्वारा जारी आदेश के बाद पंचायत की प्रस्तावित 12 दुकानों में से 8 दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है। इस निर्णय के बाद पंचायत प्रशासन, संभावित बोलीदाताओं और स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा का माहौल है।
अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां न्यायालय राजस्व अभिलेखों, सीमांकन और भूमि स्वामित्व से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लेगा। तब तक विवादित दुकानों की नीलामी और उनसे संबंधित किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई पर प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
भारी गहमा-गहमी और विवादों के बीच संपन्न हुई थी नीलामी
ग्राम पंचायत सोनहत की दुकानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू से ही विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रही थी। नीलामी के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और बोलीदाता पंचायत परिसर में मौजूद रहे, जिसके चलते माहौल काफी गर्म रहा। कई लोगों ने दुकानों की भूमि और स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए थे, वहीं कुछ प्रतिभागियों ने नीलामी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
नीलामी के दौरान कई बार तीखी बहस और गहमा-गहमी की स्थिति भी निर्मित हुई, हालांकि पंचायत प्रशासन ने प्रक्रिया को नियमानुसार संपन्न कराने का दावा किया था।
अब तहसील न्यायालय द्वारा विवादित दुकानों पर स्थगन आदेश जारी किए जाने के बाद नीलामी के समय उठाई गई आपत्तियों और आशंकाओं को और बल मिला है, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
नए रिकॉर्ड में शासकीय, पुराने रिकॉर्ड में निजी स्वामित्व का दावा
विवाद की जड़ राजस्व अभिलेखों में दर्ज रिकॉर्ड की विसंगति को माना जा रहा है। वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित भूमि को शासकीय भूमि के रूप में दर्ज बताया जा रहा है, जबकि आवेदक पक्ष का दावा है कि पुराने खसरा एवं नक्शों के अनुसार उक्त भूमि उनके स्वामित्व की है। हल्का पटवारी की जांच रिपोर्ट में भी पुराने और नए अभिलेखों के बीच अंतर होने का उल्लेख किया गया है, जिससे भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
इसी विरोधाभास के चलते न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी सुनवाई में पुराने दस्तावेजों और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद भूमि के स्वामित्व को लेकर न्यायालय क्या निर्णय देता है।
फिलहाल नहीं हो सकेगा दुकानों का संचालन
तहसील न्यायालय द्वारा विवादित दुकानों पर यथास्थिति बनाए रखने
का अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद संबंधित दुकानों का संचालन फिलहाल शुरू नहीं हो सकेगा। न्यायालय के अंतिम निर्णय तक न तो दुकानों का कब्जा हस्तांतरित किया जा सकेगा और न ही नीलामी में सफल बोलीदाताओं को व्यवसायिक गतिविधियां प्रारंभ करने की अनुमति मिलेगी।
न्यायालय के आदेश के बाद पंचायत प्रशासन भी किसी प्रकार की नई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में दुकानों के आवंटन और संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता तब तक बरकरार रहेगी, जब तक मामले का विधिवत निराकरण नहीं हो जाता। इससे नीलामी में भाग लेने वाले बोलीदाताओं को भी न्यायालय के अगले आदेश का इंतजार करना पड़ेगा।

