सूरजपुर शिक्षा से दूर हो चुकी एक छात्रा को पुनः विद्यालय की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय प्रयास शिक्षक द्वारा किया गया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी अवधेश कुमार साहू के मार्गदर्शन में प्रवेश कराया। पतरापाली से लगे ग्राम दवना के प्राथमिक शाला भरूहमूड़ा से वर्ष 2025 में कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद छात्रा दुर्गावती, पिता भंवर सिंह ने आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया था।

शिक्षक के प्रयास से अब छात्रा का पुनः विद्यालय में प्रवेश कराया गया है और वह पढ़ाई को लेकर काफी उत्साहित है।
जानकारी के अनुसार, कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद दुर्गावती ने आगे विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। माध्यमिक शाला पतरापाली के शिक्षक योगेश साहू द्वारा छात्रा के पालकों से संपर्क कर विद्यालय में प्रवेश नहीं कराने का कारण पूछा गया। पालकों ने बताया कि छात्रा विद्यालय जाने के लिए तैयार नहीं थी। और अपने नानी के यहाँ चली गई थी। इसके साथ ही छात्रा का जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण भी आगे विद्यालय में प्रवेश कराने में परेशानी आ रही थी। शिक्षक योगेश साहू ने छात्रा एवं उसके परिजनों से चर्चा कर उन्हें शिक्षा के महत्व एवं बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान के संबंध में जानकारी दी।

उन्होंने पालकों को समझाया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए और आवश्यक दस्तावेज तैयार कराकर, शिक्षकों से संपर्क स्थापित कर छात्रा को नियमित रूप से विद्यालय भेजना चाहिए। शिक्षक के समझाइश व संपर्क के बाद छात्रा ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने की इच्छा जताई। विद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद दुर्गावती में पढ़ाई को लेकर बहुत उत्साह देखने को मिला।

विद्यालय में छात्रा के पुनः प्रवेश के अवसर पर प्रधान पाठक के.के. यादव एवं शिक्षिका अनिता सिंह द्वारा उसे निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश प्रदान किया गया। वहीं शिक्षक योगेश साहू ने छात्रा का उत्साहवर्धन करते हुए अपने स्तर पर कॉपी एवं पेन उपलब्ध कराए, ताकि आवश्यक शिक्षण सामग्री के अभाव में उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो। इस पहल से छात्रा को न केवल विद्यालय वापस आने का अवसर मिला, बल्कि उसके परिवार में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
शिक्षकों का यह प्रयास इस बात का उदाहरण है कि शिक्षक यदि बच्चों और उनके पालकों से निरंतर संपर्क एवं संवाद बनाए रखें, तो शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
विद्यालय परिवार ने छात्रा के नियमित विद्यालय आने और बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए उसे प्रोत्साहित किया। दुर्गावती भी पुनः विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने को लेकर उत्साहित नजर आई।

