सोनहत (कोरिया) – वशिष्ठ टाइम्स https://vashishthtimes.com ... Sun, 05 Jul 2026 10:35:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 सोनहत (कोरिया), मीडिया की मुहिम रंग लाई, तकनीकी स्वीकृति https://vashishthtimes.com/?p=34413 https://vashishthtimes.com/?p=34413#respond Sun, 05 Jul 2026 09:57:34 +0000 https://vashishthtimes.com/?p=34413 जर्जर पशु औषधालय सोनहत भवन के लिए 19.66 लाख की तकनीकी स्वीकृति, कर्मचारियों में खुशी की लहर

सोनहत (कोरिया)।
रिपोर्ट – नीलेश सोनी/

लगातार उठती जनआवाज़, स्थानीय मीडिया की तथ्यपरक रिपोर्टिंग और प्रशासन की सक्रियता का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है।

लंबे समय से जर्जर हालत में संचालित हो रहे सोनहत पशु औषधालय भवन के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। भवन निर्माण के लिए 19.66 लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है, जिससे क्षेत्र के पशुपालकों, कर्मचारियों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।

पशु औषधालय की पुरानी इमारत वर्षों से जर्जर स्थिति में थी। भवन की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी थीं, जिससे कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार खतरा बना हुआ था।

इस गंभीर समस्या को स्थानीय मीडिया ने समय-समय पर प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. संदीप ने बताया कि मीडिया द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे का सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

विभाग ने भवन निर्माण का विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा था, जिसे अब 19.66 लाख रुपये की तकनीकी स्वीकृति प्राप्त हो गई है। इससे नए भवन निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

उपलब्ध तकनीकी प्रतिवेदन के अनुसार, ग्राम पंचायत सोनहत में पशु औषधालय भवन निर्माण कार्य के लिए 19.66 लाख रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। संबंधित अधिकारियों द्वारा तकनीकी अनुमोदन भी प्रदान कर दिया गया है।

इस निर्णय के बाद पशु विभाग के कर्मचारियों में उत्साह और संतोष का वातावरण है। उनका कहना है कि सुरक्षित एवं आधुनिक भवन बनने से न केवल कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को भी गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में सुविधा होगी।

यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि जिम्मेदार और तथ्याधारित पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जनहित के मुद्दों को प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाकर समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

मीडिया और प्रशासन के सकारात्मक समन्वय का यह उदाहरण लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और जनसेवा की भावना को और अधिक मजबूत करता है।

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सोनहत (कोरिया), छत्तीसगढ़ | विशेष संवाददाता,15 वर्षों से टूटा पुल, सोनहत के वनांचल ग्राम गिधेर में विकास के दावों की खुली पोल, https://vashishthtimes.com/?p=34407 https://vashishthtimes.com/?p=34407#respond Sun, 05 Jul 2026 09:41:04 +0000 https://vashishthtimes.com/?p=34407 15 वर्षों से टूटा पुल,
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता पर उठे गंभीर सवाल

सोनहत विकासखंड के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत गिधेर में विकास की तस्वीर बेहद चिंताजनक और दर्दनाक है। यहां लगभग 15 वर्षों से एक महत्वपूर्ण पुल टूटा पड़ा है,

जिसके कारण हजारों ग्रामीणों का जीवन संकट में गुजर रहा है। पुल के अभाव में स्कूली बच्चे, शिक्षक, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को मजबूर हैं।

बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर पूरा गांव बाहरी दुनिया से कट जाता है। ऐसे समय में यदि किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो या किसी गंभीर मरीज को उपचार की आवश्यकता हो, तो ग्रामीणों के पास चारपाई या कंधों के सहारे नदी पार कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। कई बार यह मजबूरी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि जिन मासूम बच्चों के हाथों में किताबें और भविष्य के सपने होने चाहिए, वे प्रतिदिन मौत के साये में नदी पार कर शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं।

यह दृश्य विकास के तमाम सरकारी दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से पुल निर्माण की मांग की जा रही है। चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की समस्याएं भी उनकी प्राथमिकताओं से गायब हो जाती हैं।

आज तक न तो स्थायी समाधान निकाला गया और न ही निर्माण कार्य शुरू हो सका।

स्थानीय ग्राम पंचायत, संबंधित विभाग, जिला प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक तथा सांसद की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ी जनहानि होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की नैतिक जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की होगी।

यह मामला केवल एक पुल का नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और ग्रामीणों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा जनहित का गंभीर विषय है। जब देश आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों को छूने का दावा कर रहा है, तब गिधेर जैसे वनांचल गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन, संबंधित विभाग, क्षेत्रीय विधायक, सांसद एवं जनप्रतिनिधियों से तत्काल पुल निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराने की मांग की है, ताकि वर्षों से झेली जा रही इस पीड़ा का स्थायी समाधान हो सके।

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